गेंदा एक खूबसूरत फूल होता है . और इसकी खुशबू भी मधुर होती है. ये हम सभी जानते हैं. इसे मैरीगोल्ड भी कहते हैं. कोई भी पूजा हो या त्योहार सबसे ज्यादा Marigold (Genda) गेंदे के फूल ही इस्तेमाल होते हैं. और ये भगवान को सबसे ज्यादा प्रिय होते हैं . इसकी खूबसूरती हमारा मन मोह लेती है . यह कई तरह का होता है. गेंदे में बहुत सारे गुण छिपे होते हैं . आईये जानते हैं इस के गुण
गेंदा के फूल बहुत प्रसिद्ध है | गेंदा के फूलों के हार देवी – देवतओं पर चढाए जाते है , इसलिए इसे पवित्र माना जाता है | इसका पौधा २-3 फीट तक ऊँचा होता है | गेंदा को इंग्लिश में Marigold और मराठी में झेंडू कहते है |
इसकी पत्तिया कुछ लंबी , अंत में पतली हो जाती है | पत्तियों पर धारिया बनी होती है | गेंदा के फूल लाल , पीले ,संतरी तथा सफेद रंग के होते है | सभी गेंदों के पौधे के गुण समान होते है |
यह श्वास , पथरी , शूल , बवासीर तथा विषनाशक है | यह कटु , तिक्त , कषाय तथा वात , पित्त नाशक है|
गेंदा के लाभ और घरेलू उपाय :
सूजन :
गंदे के पत्तों को पानी में उबालकर सूजे स्थान पर बांधने से सूजन दूर हो जाती है |
कान का दर्द :
गंदे की पत्तियों का रस निकालकर कान में डालने से दर्द कम हो जाता है | 4-5 दिन तक लागातार रस डालने से दर्द हमेशा के लिए मिट जाएगा |
दांत का दर्द :
गंदे के पत्तो को पानी में उबालकर कुल्ला करने से दांत का दर्द ठीक हो जाता है |
दाद :
गंदे के फूलों का रस दाद पर लगाने से दाद और छाजन ठीक हो जाते है | फूलों का रस लगातर , उसके ऊपर उबले हुए पत्तो की पुल्टिस बाँधी जाए तो दाद व छाजन में तुरंत लाभ होता है |
खूनी बवासीर :
१० ग्राम गेंदे के पत्ते व ७ नग कालीमिर्च – दोनों को पानी में पीस – छानकर हर पीने से खूनी बवासीर ठीक हो जाती है |
स्तनों के रोग :
स्तनों पर खारिश या सूजन होने पर स्तनों पर गेंदे की पत्तियों की मालिश करने से खुजली और सूजन दूर हो जाती है |
बर्र का विष :
बर्र द्वारा डंक मारे हुए स्थान पर गेंदे के पत्तो को पीसकर लगाने से तथा पत्तो को पानी में पीसकर व छानकर पिलाने से दर्द और सूजन में शीघ्र लाभ होता है |
गेंदे के फूल के फायदे
जिन पुरुषों को स्पर्मटोरिया की शिकायत है, उन्हें गेंदा फूल का रस पीना चाहिए। अगर आप गेंदा फूल को सुखाकर उसमेंं मिश्री मिलाकर उसका सेवन करते हैं तो पुरुषों को शक्ति मिलती है। अगर इसे नारियल के तेल में मिक्स करके अपने शरीर पर हल्की-हल्की मालिश करते हैं तो हमें फोड़ें, फुंसियों का सामना नहीं करना पड़ता।
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